उज्जैन-(पल्लवी शर्मा)
कविता
बढ़ ही रही बीमारी ये तो
कम होने का नाम नहीं
कर रहे हम जतन बचत के
पर आ रहे वो काम नहीं
कुछ शहर बस बचे हुए हैँ
पर डर में वो धंसे हुए हैँ
दूर रहे कोरोना हमसे
सुनना चाहते नाम नहीं
जिन शहरों में कोरोना है
सबका बस यही रोना है
कब जाएगी ये बीमारी
मन को ज़रा आराम नहीं
समझो बस प्रकृति के इशारे
नष्ट किये जो संसाधन सारे
उनको अब संरक्षित रखना
करना गलत कोई काम नहीं
*लेखक*
*ऋषिकेश शर्मा "" चिराग़ ""*